RBI ने लिए बड़े फ़ैसले 

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भारतीय रिजर्व बैंक की RBI Monetary Policy committee की बैठक 6 अप्रैल को शुरू हुई थी. इसके बाद RBI की तरफ से रेपो रेट को लेकर बड़ा ऐलान किया गया है.

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) ने शुक्रवार को मॉनिटरी पॉलिसी का ऐलान किया. MPC ने पॉलिसी दरों में कोई बदलाव नहीं किया है. रेपो रेट (Repo Rate) 4 फीसदी पर बरकरार है.

ये लगातार 11वीं बार है जब केंद्रीय बैंक (Central Bank) ने ब्‍याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है. इससे पहले, रिजर्व बैंक ने आखिरी बार 22 मई 2020 को रेपो रेट में बदलाव किया था.

रिवर्स रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास के मुताबिक, रिवर्स रेपो रेट (Reverse repo rate) में भी कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है. यह भी 3.35% हो गया है.

मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी रेट (MSFR) और बैंक रेट 4.25 फीसदी रहेगा. पॉलिसी का रुख ‘Accommodative’ रखा गया है. आगे चलकर अकोमोडेटिव रुख में बदलाव करेंगे.

सप्लाई चिंता से दबाव

RBI गवर्नर शक्तिकांता दास ने कहा- दरों को लेकर अकोमोडेटिव रुख बरकरार है. सभी सदस्यों की सहमति से ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है.

हालांकि सप्लाई चिंता को लेकर वैश्विक बाजारों में दबाव है. सप्लाई में बाधा से कमोडिटी बाजार में दबाव है. 

इकोनॉमी को अभी सपोर्ट

गवर्नर ने कहा कि इकोनॉमी को अभी सपोर्ट की जरूरत है. ऐसे में मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी के सदस्यों ने मिलकर महत्वपूर्ण पॉलिसी रेट को बरकरार रखने का फैसला किया है.

गवर्नर दास ने कहा कि इस समय इकोनॉमी के सामने डबल चुनौती है.

RBI गवर्नर की बड़ी बातें

  1. FY23 GDP ग्रोथ अनुमान 7.8% से घटाकर 7.2%  
  2. FY23 के Q2 में GDP ग्रोथ अनुमान 7% से घटाकर 6.2%  
  3. FY23 के Q3 में GDP ग्रोथ अनुमान 4.3% से घटाकर 4.1%  
  4. FY23 के Q4 में GDP ग्रोथ अनुमान 4.5% से घटाकर 4%  
  5. FY23 में महंगाई दर 5.7% रहने का अनुमान  
  6. महंगाई दर अनुमान 4.5% से बढ़ाकर 5.7% किया  
  7. GDP ग्रोथ अनुमान $100/बैरल पर आधारित  
  8. बाजार से धीरे-धीरे लिक्विडिटी बाहर निकालेंगे  
  9. SDF से मोनेटरी पॉलिसी फ्रेमवर्क मजबूत होगा  
  10. करेंसी मार्केट 18 अप्रैल से सुबह 9 बजे खुलेंगे
  11. सस्टेनेबल फाइनेंस, क्लाइमेट रिस्क पर पेपर जारी करेंगे  
  12. सभी रेगुलेटेड कंपनियों में ग्राहकों की सर्विस स्टडी के लिए पैनल का गठन  
  13. एटीएम में बिना कार्ड के पैसे निकासी के प्रस्ताव पर काम जारी
  14. पेमेंट सर्विस ऑपरेटर्स के लिए साइबर सिक्योरिटी गाइडलाइन्स जारी होंगे

नई सेवाओं से आएगा बदलाव

आरबीआई गवर्नर ने कहा, “रिजर्व बैंक ने पिछले कुछ वर्षों में उपभोक्ता संरक्षण को बढ़ाने के लिए कई उपाय किए हैं. इन उपायों में ग्राहक सेवा, आंतरिक शिकायत निवारण और लोकपाल तंत्र पर नियामकीय ढांचा तैयार करना शामिल है.

”उन्होंने कहा कि फाइनेंस से जुड़ी कंपनियों द्वारा नई-नई सेवाओं और उत्पादों के ऑफर, डिजिटल सेवाओं की बढ़ती लोकप्रियता और विभिन्न सेवा प्रदाताओं के इस क्षेत्र में आने से वित्तीय परिदृश्य तेजी से परिवर्तन हो रहा है.

ग्राहक सेवा की वर्तमान स्थिति की जांच और समीक्षा करने के लिए एक समिति गठित करने का प्रस्ताव किया गया है.

जलवायु संबंधी वित्तीय जोखिम से भी होगा बचाव

उन्होंने यह भी बताया कि पर्यावरण से संबंधित वित्तीय जोखिमों के संभावित प्रभाव की बेहतर समझ और मूल्यांकन की सुविधा के लिए जल्द ही क्लाइमेट रिस्क एंड सस्टेनेबल फाइनेंस (Climate Risk and Sustainable Finance) पर फीडबैक के लिए एक डिस्कशन पेपर प्रकाशित किया जाएगा.

क्लाइमेट रिस्क और सस्टेनेबल फाइनेंस के क्षेत्र में कुछ नियामकीय पहलों से जलवायु जोखिम को बेहतर ढंग से संभालने और आपातकालीन समय में उनका मार्गदर्शन करने में मदद मिलेगी.

App के ज़रिए लोन देने वाली कंपनियों की मनमानी ख़त्म होगी 

झटपट लोन देने वाली कंपनियों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ी है। ये कंपनियां कुछ ही मिनटों में लोन की राशि आपके खातों में ट्रांसफर कर देती हैं।

इनमें से ज्यादातर वित्तीय कंपनियां ऐप के जरिए ही लोन देती हैं बाद में जब लोन वसूली की बारी आती है तो ये ग्राहकों से बहुत बुरा बर्ताव करती हैं. ग्राहकों से इनकी मनमानी की शिकायतें अक्सर आती रहती हैं।

इन कंपनियों की मनमानी रोकने के लिए रिजर्व बैंक (RBI) डिजिटल लेंडिंग (Digital Lending) के लिए अगले दो महीने में दिशा-निर्देश जारी करेगा. रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति का ऐलान करते हुए यह जानकारी दी।

दो महीने में जारी होंगे गाइडलाइंस

शक्तिकांत दास ने बताया कि डिजिटल लेंडिंग पर वर्किंग ग्रुप के सुझाव पर काफी सारे कमेंट्स आए हैं. इनकी जांच पूरी हो चुकी है।

अब इस पर आंतरिक चर्चा होगी और एक-दो महीने में देशा-निर्देश को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। रिजर्व बैंक को डिजिटल लेंडिंग ऐप और प्लेटफॉर्म के पीड़ित ग्राहकों की शिकायतें लगातार मिलती रहती हैं.

शक्तिकांत दास ने कहा कि कई बार हमें ये शिकायतें सोशल मीडिया के जरिए मिली हैं। हम तुरंत ऐसे मामलों की जांच करते हैं.

ग्राहकों से होती है जोर-जबर्दस्ती

ये कंपनियां ऐप पर ग्राहकों को फटाफट लोन दे देती हैं मगर इनका ब्याज दर बहुत ज्यादा होता है। बिना पूरी पड़ताल किए ग्राहक ऐसे ऐप से लोन ले लेते हैं।

समय पर लोन नहीं चुका सकने वाले ग्राहकों से रिकवरी के लिए ये अनैतिक तरीकों का इस्तेमाल करती हैं और जोर-जबर्दस्ती करती हैं। 

रिजर्व बैंक ने चाइनीज ऐप के बहुत ज्यादा ब्याज पर कर्ज देने और रिकवरी में ज्यादती करने की खबरें आने के बाद 13 जनवरी, 2021 को एक वर्किंग ग्रुप बनाया था। आरबीआई के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर जयंत कुमार दास इस ग्रुप के प्रमुख थे। ग्रुप ने पिछले साल नवंबर में अपनी रिपोर्ट दे दी थी।

ऐक्सिस और आईडीबीआई बैंक पर लगा 90-90 लाख रुपए का जुर्माना

दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने पर रिजर्व बैंक ने दोनों बैंको को कारण बताओ नोटिस जारी किया था. इसके जवाब में दोनों बैंक सही कारण नहीं बता पाए थे. उसके बाद ही केंद्रीय बैंक ने जुर्माना लगाने का फैसला किया.

एक्सिस बैंक पर क्या हैं आरोप

रिजर्व बैंक ने जुर्माना लगाने के अपने आदेश में कहा है कि एक्सिस बैंक ने ग्राहकों को बीमा उत्पादों की बिक्री में केंद्रीय बैंक की ओर से प्रतिबंधित किए गए चलन का पालन किया.

साथ ही ग्राहकों द्वारा पेश किए गए आधिकारिक रूप से वैध दस्तावेजों की प्रति को मूल दस्तावेज से सत्यापित करने में विफल रहा.

इसके अलावा सेविंग अकाउंट में न्यूनतम राशि नहीं रखने पर ग्राहकों पर पेनाल्टी लगाया. जबकि यह पेनाल्टी न्यूनतम राशि की सीमा की तुलना में आनुपातिक नहीं है.

आईडीबीआई पर ये हैं आरोप

वहीं सार्वजनिक क्षेत्र के आईडीबीआई बैंक के बारे में रिजर्व बैंक का कहना है कि बैंक ने धोखाधड़ी की सूचना केंद्रीय बैंक को देर से दी.

5 करोड़ रुपये और उससे अधिक राशि की धोखाधड़ी के संबंध में आईडीबीआई बैंक ने देर से रिजर्व बैंक को फ्लैश रिपोर्ट दी. दो सहकारी बैंकों के खाते में अनधिकृत लेनदेन के जरिए ये धोखाधड़ी की गई थी.

केंद्रीय बैंक धीरे-धीरे लिक्विडिटी वापस लेने की शुरुआत करेगा

शक्तिकांत दास ने कहा, “कोरोना को देखते हुए लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए कई तरह के उपाय किए गए थे। आरबीआई ने अपने स्तर पर भी लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए थे।

इससे सिस्टम में 8.5 लाख करोड़ की अतिरिक्त लिक्विडिटी है।” उन्होंने कहा कि लिक्विडिटी को वापस लेने में कुछ साल लग जाएंगे। यह दो साल या तीन साल हो सकता है।

आरबीआई लिक्विडिटी की कमी नहीं होने देगा

केंद्रीय बैंक के गवर्नर ने कहा कि हमारा मकसद सिस्टम में अतिरिक्त लिक्विडिटी में कमी लाना है। हम इसे उस स्तर पर लाना चाहते हैं, जो मौजूदा मॉनेटरी पॉलिसी से मेल खाती हो।

उन्होंने कहा कि ऐसा करने के दौरान हम यह सुनिश्चित करना चाहेंगे कि इकोनॉमी की जरूरतें पूरी करने के लिए सिस्टम में किसी तरह की लिक्विडिटी की कमी न हो।

स्टेंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी लिक्विडिटी घटाने में मदद करेगी

एसडीएफ लिक्विडिटी को मैनेज करने के लिए आरबीआई का बड़ा टूल होगा। सबसे पहले 2014 में उर्जित पटेल कमेटी ने स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी शुरू करने की सिफारिश की थी।

कई बार बैंकों के पास जरूरत से ज्यादा पैसा हो जाता है तो कई बार उनके पास जरूरत से कम पैसे होते हैं। जरूरत से कम पैसे होने पर वे रेपो रेट के तहत आरबीआई से उधार लेते हैं। इसके लिए उन्हें बतौर कौलेटरल गवर्नमेंट सिक्योरिटीज आरबीआई के पास रखने पड़ते हैं।

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