क्या हैं कॉमन सिविल कोड, क्यों हो रहा हैं इसका विरोध ?

Spread the love

देश में एक बार फिर कामन सिविल कोड (UCC) लागू करने की माँग शुरू हो गई हैं | ऐसे में देश के गृह मंत्री अमित शाह शुक्रवार को भोपाल दौरे पर सभी राज्यों में कामन सिविल कोड लागू करने का संकेत दे दिए हैं| जिसके बाद उत्तर प्रदेश में भी इसको लेकर माहौल बनने लगा है। उत्तर प्रदेश सरकार में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का मानना है कि उत्तर प्रदेश में भी कामन सिविल कोड लागू होना चाहिए।

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि सभी को समान नागरिक संहिता यानी कामन सिविल कोड की मांग करने के साथ ही इसका स्वागत भी करना चाहिए। उत्तर प्रदेश सरकार भी इस दिशा में सोच रही है। हम इसके पक्ष में हैं और यह उत्तर प्रदेश और देश के लोगों के लिए अति आवश्यक है।

उन्होंने आगे कहा कि समान नागरिक संहिता भाजपा के मुख्य वादों में से एक है। उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि देश के साथ प्रदेश में वाकई अब इसकी आवश्यकता है, किसी के लिए कुछ और किसी के लिए कुछ कानून हो, इससे बाहर निकल कर उत्तर प्रदेश सरकार कामन सिविल कोड को लेकर गंभीरता से विचार कर रही है।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से उत्तराखंड सरकार कामन सिविल कोड लागू करने जा रही है ठीक उसी प्रकार उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भी और देश के अन्य राज्यों में भी जहां भाजपा की सरकार है, वहां पर कामन सिविल कोड को लेकर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

क्या है कामन सिविल कोड? 

समान नागरिक संहिता यानी कामन सिविल कोड को अगर आसानी से परिभाषित किया जाए तो भारत में रहने वाले हर नागरिक के लिए एक समान कानून होना, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का क्यों न हो। समान नागरिक संहिता में शादी, तलाक और जमीन-जायदाद के बंटवारे में सभी धर्मों के लिए एक ही कानून लागू होगा।

कॉमन सिविल कोड का अर्थ आप एक निष्पक्ष कानून से समझ सकते है, जिसका किसी धर्म से कोई संबंध नहीं है। समान नागरिक संहिता एक धर्मनिरपेक्ष कानून होता है जो सभी धर्मों के लोगों के लिए समान रूप से लागू होता है।

कामन सिविल कोड लागू होने से हर मजहब के लोगो के लिए एक जैसा कानून आ जाएगा। वर्तमान में देश में हर धर्म के लोग इन मामलों का निपटारा अपने पर्सनल लॉ के अधीन करते हैं। फिलहाल मुस्लिम, ईसाई और पारसी समुदाय का पर्सनल लॉ है जबकि हिन्दू सिविल लॉ के तहत हिन्दू, सिख, जैन और बौद्ध धर्म आते हैं।

संविधान में समान नागरिक संहिता को लागू करना अनुच्‍छेद 44 के तहत राज्‍य की जिम्‍मेदारी बताया गया है, लेकिन ये आज तक देश में लागू नहीं हो पाया हैं जबसे भाजपा सरकार आई हैं इसको लेकर एक बड़ी बहस चल रही है और वक़्त वक़्त पर इसको लागू करने की माँग भी उठती रही हैं।

देश में क्यों हैं कामन सिविल कोड की आवश्यकता ? 

अलग-अलग धर्मों के अलग कानून से न्यायपालिका पर अत्यधिक बोझ पड़ता है। समान नागरिक संहिता लागू होने से इस परेशानी से निजात मिलेगी और अदालतों में वर्षों से पड़े मामलों के फैसले जल्द होंगे। शादी, तलाक, गोद लेना और जायदाद के बंटवारे में सबके लिए एक जैसा कानून होगा फिर चाहे वो किसी भी धर्म से ताल्लूक क्यो न रखता हो।

वर्तमान में हर धर्म के लोग इन मामलों का निपटारा अपने पर्सनल लॉ यानी निजी कानूनों के तहत करते हैं। कानून के जानकारों से लेकर आम लोगों तक सभी का मानना हैंकी  एक समानता से देश में एकता बढ़ेगी और जिससे हमारा देश तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ेगा।

देश में हर भारतीय पर एक समान कानून लागू होने से देश की राजनीति पर भी इसका खूब असर पड़ेगा और राजनीतिक दल वोट बैंक वाली राजनीति नहीं कर सकेंगे जिससे वोटों का ध्रुवीकरण नहीं होगा।

कई देशों में लागू है कॉमन सिविल कोड

जहाँ एक तरफ भारत में समान नागरिक संहिता को लेकर बड़ी बहस चल रही है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान, बांग्लादेश, मलेशिया, तुर्की, इंडोनेशिया, सूडान और इजिप्ट जैसे कई देश इस कानून को अपने यहां लागू कर चुके हैं। 

विपक्ष क्यों कर रहा है विरोध ? 

भारत में कॉमन सिविल कोड का विरोध करने वालों का मानना है कि यह सभी धर्मों पर हिन्दू कानून को लागू करने जैसा है। चूंकि भारत एक ऐसा देश है जहाँ मुद्दे पर राजनीति होती विपक्ष में चाहें कोई भी हो सत्ता पक्ष का विरोध करता हैं। 

इसी तरह की और जानकारी के लिए हमारे Facebook पेज को लाइक करें और Instagram, Twitter पे हमें फ़ॉलो करें। आप इस विषय में कोई भी जानकारी कॉमेंट्स के द्वारा हम तक पहुँचा सकते हैं। आप के सुझाव हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं|