इस वजह के चलते बंद हुई KGF
साउथ की सबसे बड़ी फिल्मों में शामिल केजीएफ 2 (KGF 2) के ट्रेलर ने धमाल मचा दिया है। बेसब्री से इस फिल्म का लोग इंतजार कर रहे थे।
इस फिल्म की कहानी एक सोने की खदान से जुड़ी हुई है जिसका इतिहास 121 साल पुराना है। यह फिल्म रियल लाइफ की घटनाओं पर आधारित है।
KGF यानी Kolar Gold Fields की कहानी बिल्कुल फिल्म की तरह खूनी है। कर्नाटक के दक्षिण पूर्व इलाके में Kolar Gold Fields स्थित है।
साल 1871 में जब भारत पर अंग्रेजों का शासन था, तो इस दौरान ब्रिटिश सैनिक माइकल फिट्ज़गेराल्ड लेवेली ने बेंगलुरू में अपना घर बनवाया था।
वह किताबों और आर्टिकल को पढ़ने में ज्यादातर समय व्यतीत करते थे। उनको भारत के इतिहास के बारे में जानने में उत्सुकता थी।
उन्होंने साल 1804 में प्रकाशित एशियाटिक जर्नल का लेख पढ़ा। इस लेख में बताया गया था कि कोलार में लोग हाथ से जमीन खोदते हैं और सोना निकाल लेते हैं।
क्या है KGF का इतिहास
रिपोर्ट्स के मुताबिक, KGF से इन सालों में 900 टन सोना निकाला जा चुका है। ब्रिटिश सरकार के लेफ्टिनेंट जॉन वॉरेन ने इस खान के बारे में लेख लिखा था।
उन्होंने अपने इस आर्टिकल में बताया था कि साल 1799 में श्रीरंगपट्टनम की लड़ाई में अंग्रेजों ने टीपू सुल्तान को मार दिया। इसके बाद उन्होंने कोलार और आसपास के इलाकों को कब्जा लिया।
हालांकि कुछ सालों बाद यह जमीन मैसूर राज्य को सौंप दी गई, लेकिन सर्वे का अधिकार अंग्रेजों के पास ही रहा।
हाथों से निकाला जाता था सोना
इसे लेख में बताया गया था कि उस दौरान कोलार में चोल साम्राज्य का शासन था। सबसे हैरान वाली बात यह है कि यहां पर लोग हाथ से खोदकर सोना निकाल लेते थे।
वॉरेन ने घोषणा की कि सोना निकालने वालों को इनाम दिया जाएगा। इसके बाद जब लोगों ने सोना निकाला तो करीब 56 किलो मिट्टी में थोड़ा सा ही सोना निकला। इसके बाद तकनीक का इस्तेमाल किया गया।
अंग्रेजों ने 1804 से लेकर 1860 तक सोना निकालने के लिए खतरनाक एक्सपेरिमेंट किए़, लेकिन उनके हाथ कोई कामयाबी नहीं लगी बल्कि कई मजदूरों की मौत हो गई। इसके बाद अंग्रेजों ने खुदाई पर रोक लगा दी।
KGF में लग गया था अंग्रेजों का जमावड़ा
अंग्रेजों की सबसे पसंदीदा जगह बन गई Kolar Gold Fields। ब्रिटिश अधिकारियों और इंजीनियर्स ने यहां पर अपना-अपना घर बनाना शुरू कर दिया।
ठंडा होने की वजह से यह एक वैकेशन स्पॉट की तरह था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक समय केजीएफ को छोटा इंग्लैंड कहा जाता था।
इसके बाद लेवेली के मन में रिसर्च करने का ख्याल आया है और कोलार पहुंच गए। मैसूर के महाराज साल 1873 में लेवेली को कोलार में खुदाई की इजाजत दी।
1875 में फिर से खुदाई शुरू की गई। रोशनी के लिए यहां पर बिजली का इंतजाम किया गया। कोलार भारत का पहला शहर है जहां पर सबसे पहले बिजली पहुंची थी।
लेवेली की कोशिशों के बाद 1902 में केजीएफ में 95 प्रतिशत सोना निकाले जाने लगा। साल 1930 तक इस खान में 30 हजार मजूदर खुदाई करने लगे थे।
अब खंडहर में तब्दील हो चुकी है KGF
आजादी के बाद KGF की खादानों पर भारत सरकार का कब्जा हो गया है। साल 1956 में इस सोने की खान का राष्ट्रीयकरण हो गया।
भारत गोल्ड माइन्स लिमिटेड कंपनी ने साल 1970 में यहां पर सोना निकालने का काम शुरू किया। इस खदानों से सरकार को शुरुआत में तो फायदा हुआ, लेकिन 1980 का दौर आने तक कंपनी घाटे में पहुंच गई।
कम्पनी के पास मजदूरों को देने के लिए आमदनी नहीं बची। साल 2001 में यहां पर खुदाई बंद कर दी गई। इसके बाद से Kolar Gold Fields खंडहर में तब्दील हो गए। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जाता है कि KGF में अभी भी सोना है।
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