भारत में ग़रीबों की संख्या हुई कम:IMF 

Spread the love

भारत के लिए एक राहत भरी खबर है, जो IMF की ओर से आई है। दरअसल, भारत में बेहद गरीबी में जीवन-यापन करने वाले लोगों की संख्या बहुत कम रह गई है।

IMF के नए वर्किंग पेपर के अनुसार, ऐसे लोगों का आंकड़ा अब एक फीसदी से भी कम रह गया है। इसके साथ ही रिपोर्ट में कहा गया है कि असमानता का दायरा भी कम हुआ है। 

असमानता 30 साल के निम्न स्तर पर 

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का यह वर्किंग पेपर अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला, अरविंद विरमानी और करण भसीन ने तैयार किया है।

इसमें कहा गया है कि भारत में बेहद गरीब लोगों की संख्या कोरोना महामारी के संकट काल में भी इसी स्तर पर स्थिर रही है।अर्थशास्त्रियों ने कहा कि देश में असमानता का स्तर 30 सालों के निचले स्तर पर पहुंच गया है।

पेपर में आंकड़ों के साथ कहा गया कि देश में खाद्य सब्सिडी के बाद की असमानता अब 0.294 के स्तर पर है जो कि 1993/94 में देखे गए अपने निम्नतम 0.284 के स्तर के बेहद करीब है।

अब 0.8 फीसदी बेहद गरीब बचे हैं भारत में 

गौरतबल है कि IMF का यह वर्किंग पेपर ऐसे समय में समाने आया है जबकि कई रिपोर्टों में इस बात का जिक्र किा गया है कि भारत में अमीरों और गरीबों के बीच जो खाई है वो लगातार बढ़ती जा रही है।

इस वर्किंग पेपर को पांच अप्रैल को पब्लिश किया गया था। इसमें आईएमएफ के अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि भारत में बेहद गरीब लोगों की संख्या 0.8 फीसदी ही रह गई है और कोरोना के पहले से यानी 2019 से इसका निचला स्तर बरकरार है।

यह पेपर 2004-05 से 2020-21 तक प्रत्येक वर्ष के लिए भारत में गरीबी और उपभोग असमानता का अनुमान प्रदर्शित करता है। 

सरकारी योजनाओं को दिया श्रेय 

पेपर में पहली बार, गरीबी और असमानता पर अपनी तरह की खाद्य सब्सिडी का प्रभाव शामिल किया गया है। इस उपलब्धि के लिए आईएमएफ के अर्थशास्त्रियों ने भारत सरकार की ओर से देश में संचालित की जा रहीं लाभकारी योजनाओं को श्रेय दिया है।

खासतौर से उन योजनाओं को जो कि राशन से जुड़ी हुई हैं। पेपर में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेवाई) का जिक्र किया गया और इसे मील का पत्थर करार दिया गया है।

कहा गया है कि राशन यह सुनिश्चित करने में अहम रहा है कि कोरोना महामारी के साल 2020 में बेहद गरीब लोगों की संख्या नहीं बढ़ी। पेपर में कहा गया कि भारत में खाद्य सब्सिडी प्रोग्राम के तहत मिली सामजिक सुरक्षा ने महामारी के असर को कम करने का काम किया है। 

2020 में शुरू की गई थी योजना 

बता दें कि पीएमजीकेवाई योजना के तहत मुफ्त अनाज की आपूर्ति वित्त अप्रैल-जून 2020 के लिए शुरू हुई थी, जिसे बाद में नवंबर, 2020 तक बढ़ाया गया था।

महामारी की दूसरी लहर के मद्देनजर, इसे फिर मई 2021 में शुरू कर दिया गया और वित्त वर्ष 22-अंत तक बढ़ा दिया गया। हाल ही में, इसे सितंबर 2022 तक बढ़ाया गया है।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत, 81.35 करोड़ से अधिक लोग प्रति व्यक्ति प्रति माह पांच किलो मुफ्त गेहूं और  चावल के साथ-साथ प्रत्येक परिवार को प्रति माह एक किलो मुफ्त साबुत चना के पात्र हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार की ओर से इस योजना में किए गए नवीनतम विस्तार से केंद्र के 80,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

क्या है IMF? (International Monetary Fund)

International Monetary Fund/अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्राकोष 187 देशों का संगठन है, जो विश्‍व में मौद्रिक सहयोग बढ़ाने, वित्‍तीय स्थिरता लाने, अंतर्राष्‍ट्रीय व्‍यापार में मदद करने, अधिक रोजगार तथा सतत् आर्थिक वृद्धि को प्रोत्‍साहन देने और विश्‍व भर में गरीबी कम करने के लिए काम करता है।

अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्राकोष का बुनियादी मिशन अंतर्राष्‍ट्रीय तंत्र में स्थिरता रखने में मदद करना है। कोष यह काम तीन तरीके से करता है : वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था और सदस्‍य देशों की अर्थव्‍यवस्‍थाओं पर निगरानी रखकर; भुगतान संतुलन में कठिनाई वाले देशों को ऋण देकर और सदस्‍यों को व्‍यावहारिक सहायता देकर।

भारत में अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्राकोष का काम, भारत सरकार, रिजर्व बैंक तथा अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्राकोष के बीच सूचना के प्रवाह में मदद देने तथा रिजर्व बैंक और राष्‍ट्रीय तथा राज्‍य सरकारों के अधिकारियों को प्रशिक्षण देने का है।

इसी तरह की और जानकारी के लिए हमारे Facebook पेज को लाइक करें और Instagram, Twitter पे हमें फ़ॉलो करें। आप इस विषय में कोई भी जानकारी कॉमेंट्स के द्वारा हम तक पहुँचा सकते हैं। आप के सुझाव हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं

https://www.wisdomganga.com/punjab-main-ghar-tak-jayega-rashan/
https://www.wisdomganga.com/bhari-matra-main-niryat-hoga-bharat-ka-gehu/